
टोयाको। अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने आज भारत-अमेरिका परमाणु समझौते की पुरजोर वकालत करते हुए इसे दोनों देशों के लिए समान रूप से "महत्वपूर्ण" बताया।
जापान में जारी जी-8 की शिखर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और बुश के बीच करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों नेताओं की भेंट जापान के होक्काइडो द्वीप पर स्थित विंडसर टोया होटल में हुई। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन, विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन भी मौजूद थे।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों के बीच हुए परमाणु समझौते के बारे में बातचीत की।
गौरतलब है कि इस समझौते से नाराज वामपंथी दलों द्वारा मंगलवार को सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर देने से कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार खतरे पड़ गई है।
हालांकि प्रधानमंत्री का कहना है कि वामदलों की समर्थन वापसी से सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
परमाणु समझौते को अपने कार्यकाल में अपनाई गई विदेश नीति की उपलब्धियों में से एक मानने वाले बुश ने कहा, "हमने इस बारे में बात की कि परमाणु समझौते तथा दोनों देशों के लिए इसकी अहमियत के बारे में बातचीत की।" बुश ने कहा कि भारत को विकास के लिए परमाणु ऊर्जा की जरूरत है।
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते इतने मधुर कभी नहीं रहे, जितने वर्तमान में हैं। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने परमाणु समझौते के अलावा जलवायु परिवर्तन, शैक्षणिक आदान-प्रदान, अंतरिक्ष में सहयोग तथा मुक्त व्यापार सहित विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।
साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक संकट सहित सभी मुद्दों पर भारत और अमेरिका को कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा।
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